जगन्नाथ दीनानाथ हैं। अर्थात् अगर कोई जीव अपने को दीन मान ले, पतित मान ले, अपराधी मान ले — मान ले भीतर से! तो वो कृपा कर देते हैं, सब क्षमा कर देते हैं, अनंत जन्म के पाप भस्म कर देते हैं, स्वयं दास बन जाते हैं!
जगन्नाथ दीनानाथ हैं। अर्थात् अगर कोई जीव अपने को दीन मान ले, पतित मान ले, अपराधी मान ले — मान ले भीतर से! तो वो कृपा कर देते हैं, सब क्षमा कर देते हैं, अनंत जन्म के पाप भस्म कर देते हैं, स्वयं दास बन जाते हैं!